भारत का ‘Sudarshan Chakra DRDO’: आसमान से बरसेगा कहर, चीन-पाकिस्तान की उड़ गई नींद

भारत  का सुरक्षा कवच : Sudarshan Chakra DRDO

भारत की रक्षा ताकत अब नई ऊँचाइयों पर पहुंच चुकी है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और इसरो (ISRO) ने मिलकर देश का सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम तैयार किया है – Sudarshan Chakra DRDO। इसका नाम भगवान विष्णु के दिव्य शस्त्र ‘सुदर्शन चक्र’ से लिया गया है, जो विनाश और विजय का प्रतीक माना जाता है।

 

23 अगस्त 2025 को ओडिशा के तट से इस सिस्टम का पहला सफल परीक्षण हुआ। इस सफलता के बाद भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि अब हमारी हवाई सुरक्षा अभेद्य है।

 

क्या है Sudarshan Chakra DRDO?

 

Sudarshan Chakra DRDO एक मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे खास तौर पर मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमलों से भारत की रक्षा के लिए डिजाइन किया गया है।

 

🔹 रेंज: 2500 किलोमीटर

🔹 ऊंचाई: 150 किलोमीटर तक मिसाइल इंटरसेप्शन

🔹 गति: 5 किलोमीटर प्रति सेकंड

🔹 टेक्नोलॉजी: AI, लेजर गाइडेड सिस्टम और एडवांस रडार नेटवर्क

🔹 लागत: अनुमानित 50,000 करोड़ रुपये

🔹 तैनाती: 2026 तक पूरी तरह डिप्लॉयमेंट की योजना

 

यह सिस्टम ग्राउंड और स्पेस दोनों पर काम करेगा, जिससे दुश्मन की किसी भी दिशा से आने वाली मिसाइल या ड्रोन को रोका जा सकेगा।

 

 

Sudarshan Chakra DRDO की मुख्य विशेषताएं

 

1. क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM)

 

30 Km तक के टारगेट को मार गिराने में सक्षम।

 

दुश्मन के टारगेट को ऑटो-ट्रैक करके सटीक वार करती है।

 

इसकी स्पीड मैक 4.7 (लगभग 5757 Km/hr)।

 

 

2. एडवांस VSHORADS सिस्टम

 

फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर और ड्रोन तक को खत्म करने में सक्षम।

 

इसे ट्रक, टैंक और आर्मर्ड व्हीकल पर आसानी से लगाया जा सकता है।

 

इसकी अधिकतम स्पीड 1800 Km/hr है।

 

 

3. लेज़र बेस्ड डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW)

 

लेजर बीम से दुश्मन के हवाई हमलों को जड़ से खत्म करने की क्षमता।

 

हाई-टेक हथियार जो भविष्य की वॉर टेक्नोलॉजी को दर्शाता है।

 

 

 

भारत के लिए Sudarshan Chakra DRDO क्यों ज़रूरी?

 

भारत की सीमाएं चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से घिरी हैं, जिनके पास आधुनिक मिसाइल और ड्रोन तकनीक है। ऐसे में Sudarshan Chakra DRDO भारत को एक मजबूत सुरक्षा कवच देगा।

 

👉 यह बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और हाइपरसोनिक हथियारों तक को इंटरसेप्ट कर सकता है।

👉 चीन का S-400 और अमेरिका का Patriot System भी इसकी तुलना में पीछे माना जा रहा है।

👉 यह सिर्फ हवाई सुरक्षा ही नहीं, बल्कि साइबर सिक्योरिटी और स्पेस बेस्ड निगरानी भी सुनिश्चित करेगा।

 

 

Sudarshan Chakra DRDO और प्रधानमंत्री का ऐलान

 

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सिस्टम को “सुदर्शन चक्र” नाम दिया और कहा कि 2035 तक इसे और आधुनिक रूप दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि रिसर्च से लेकर निर्माण तक, सब कुछ भारत में ही होगा।

 

 

दुश्मनों की नींद हराम

 

विशेषज्ञों का कहना है कि जब Sudarshan Chakra DRDO पूरी तरह तैनात होगा, तब पाकिस्तान और चीन की किसी भी मिसाइल या ड्रोन की भारत पर आक्रामक कोशिश नाकाम हो जाएगी। यह सिस्टम दुश्मन की आक्रामक नीति को जड़ से खत्म कर देगा।

 

 

भविष्य की योजना

 

2026 तक भारत में कई सामरिक ठिकानों पर इसकी तैनाती की जाएगी।

 

DRDO और ISRO इसे स्पेस सिक्योरिटी से जोड़कर और भी एडवांस बनाने पर काम कर रहे हैं।

 

2035 तक इसका अगला वर्ज़न तैयार होगा, जो हाइपरसोनिक हथियारों को और तेज़ी से इंटरसेप्ट करेगा।

 

निष्कर्ष:

 

Sudarshan Chakra DRDO सिर्फ एक एयर डिफेंस सिस्टम नहीं बल्कि भारत की नई सुरक्षा नीति का प्रतीक है। यह सिस्टम आने वाले वर्षों में भारत को दुनिया की टॉप एयर डिफेंस पावर में शामिल कर देगा।

 

भारत ने साबित कर दिया है –

👉 हम रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भ

र हैं।

👉 दुश्मन की कोई भी चाल अब बेअसर होगी।

👉 भारत का ‘सुदर्शन चक्र’ अब आसमान से बरसेगा कहर।

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